गाथा
क्रोध वर्ग: क्रोध पर विजय और आत्मसंयम (गाथा 221–234)
क्रोध वर्ग में 14 कालजयी गाथाएँ (221–234) संगृहीत हैं, जो क्रोध, अहंकार और दुर्भावना पर विजय पाने का मनोवैज्ञानिक मार्ग दर्शाती हैं। गाथा 222 में तथागत कहते हैं कि जो भड़कते क्रोध को अनियंत्रित रथ की भाँति थाम लेता है, वही सच्चा सारथी है; अन्य तो केवल लगाम पकड़ने वाले हैं। गाथा 223 में सनातन नियम प्रतिपादित है: 'अक्रोध से क्रोध को जीतो, भलाई से बुराई को जीतो, दान से कंजूस को जीतो और सत्य से झूठे को जीतो।' अंत में काया, वाणी और मन के त्रिविध संयम पर बल दिया गया है।
14 verses