१५वीं शताब्दी के महान तेलुगु संत-कवि ताल्लपाक अन्नमाचार्य द्वारा रचित अमर संकीर्तन, जो समस्त प्राणियों में भगवान श्रीहरि की अंतर्यामी उपस्थिति और सामाजिक समानता का उद्घोष करता है।