Bharat Devotion
Embroidered artwork for ब्रह्ममॊक्कटे (परब्रह्म एक ही है): Embroidered Om symbol above a brass diya, marigolds and a temple spire at sunrise

ब्रह्ममॊक्कटे (परब्रह्म एक ही है)

भजनविशिष्टाद्वैत (श्री वैष्णव सम्प्रदाय)भगवान विष्णुवेंकटेश्वर

ब्रह्ममॊक्कटे (परब्रह्म एक ही है)

१५वीं शताब्दी के महान तेलुगु संत-कवि ताल्लपाक अन्नमाचार्य द्वारा रचित अमर संकीर्तन, जो समस्त प्राणियों में भगवान श्रीहरि की अंतर्यामी उपस्थिति और सामाजिक समानता का उद्घोष करता है।

श्लोक

तंदनान अहि तंदनान पुरॆ तंदनान भळा तंदनान ब्रह्ममॊक्कटे परब्रह्ममॊक्कटे परब्रह्ममॊक्कटे परब्रह्ममॊक्कटे
Tandanana Ahi Tandanana Pure Tandanana Bhala Tandanana Brahmamokkate Parabrahmamokkate Parabrahmamokkate Parabrahmamokkate

श्लोक 1

कंदुवगु हीनाधिकमुलिंदु लेवु अंदरिकि श्रीहरे अंतरात्म इंदुलो जंतुकुलमंतानॊक्कटे अंदरिकि श्रीहरे अंतरात्म
Kanduvagu Heenadhikamulindu Levu Andariki Srihare Antaratma Indulo Jantukulamantanokkate Andariki Srihare Antaratma

श्लोक 2

निंडार राजु निद्रिंचु निद्रयु नॊक्कटे अंडने बंटु निद्र अदियु नॊक्कटे मॆंडैन ब्राह्मणुडु मॆट्टु भूमि यॊकटे चंडालुडुंडेटि सरिभूमि यॊकटे
Nindara Raju Nidrinchu Nidrayu Nokkate Andane Bantu Nidra Adiyu Nokkate Mendaina Brahmanudu Mettu Bhumi Yokate Chandaludundeti Saribhumi Yokate

श्लोक 3

अनुगु देवतलकुनु अल कामसुखमॊकटे घनकीट पशुवुलकु कामसुखमॊकटे दिनमहोरात्रमुलु तॆगि धनाढ्युनकॊकटे वोनर निरुपेदकुनु ऒक्कटे यवियु
Anugu Devatalakunu Ala Kamasukhamokate Ghanakeeta Pashuvulaku Kamasukhamokate Dinamahoratramulu Tegi Dhanadhyunakokate Vonara Nirupeedakunu Okkate Yaviyu

श्लोक 4

कॊरलि शिष्टान्नमुलु गॊनु नाकलॊक्कटे तिरुगु दुष्टान्नमुलु दिनु नाकलॊक्कटे परग दुर्गंधमुलपै वायुवॊक्कटे वरुस परिमळमुपै वायुवॊक्कटे
Korali Shishtannamulu Gonu Nakalokkate Tirugu Dushtannamulu Dinu Nakalokkate Paraga Durgandhamulapai Vayuvokkate Varusa Parimalamupai Vayuvokkate

श्लोक 5

कडगि एनुगुमीद कायु ऎंडॊक्कटे पुडमि शुनकमु मीद बॊलयु नॆंडॊक्कटे कडु पुण्युलनु पापकर्मुलनु सरिगाव जडियु श्रीवेंकटेश्वरु नाममॊक्कटे
Kadagi Eenugumeeda Kayu Endokkate Pudami Shunakamu Meeda Bolayu Nendokkate Kadu Punyulanu Papakarmulanu Sarigava Jadiyu Sreevenkateshwaru Namamokkate

श्लोक 6

पूजन विधि एवं फलश्रुति (महत्व व लाभ)

फलश्रुति
शुभ दिन व तिथि

नित्य प्रतिदिन अथवा शुभ तिथियों (एकादशी, पूर्णिमा, प्रदोष) पर

उत्तम मुहूर्त / समय

ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः 4 से 6 बजे) अथवा संध्या काल

पूजन सामग्री व अर्पण

शुद्ध घी का दीपक, धूप, ताजे पुष्प एवं नैवेद्य/जल

फलश्रुति एवं आध्यात्मिक लाभफलश्रुति
  • मानसिक शांति, आत्मिक उन्नति एवं घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार

पृष्ठभूमि

राग बौळी में निबद्ध 'ब्रह्ममॊक्कटे' तिरुमला के आराध्य भगवान वेंकटेश्वर के परम भक्त ताल्लपाक अन्नमाचार्य (१४०८-१५०३ ई.) की अत्यंत प्रसिद्ध दार्शनिक रचना है। मध्यकाल में जब समाज वर्ण-व्यवस्था से बँटा हुआ था, तब अन्नमय्या ने निडरता से उद्घोष किया कि भूख, नींद, धूप और वायु राजा और सेवक, विद्वान और वंचित सभी के लिए एक समान हैं। समस्त सृष्टि का अंतरात्मा केवल एक परब्रह्म श्रीहरि ही है। इस पल्लवी की समदृष्टि भगवद्गीता (5.18) की उस दृष्टि से मेल खाती है, जिसमें ज्ञानी ब्राह्मण और चांडाल को ज्ञानी समान देखता है। अन्नमय्या के संकीर्तन तिरुमला में ताम्रपत्रों पर उत्कीर्ण किए गए थे, और तिरुमला तिरुपति देवस्थानम् ने उन्हें 1998 में 'ताल्लपाक पद साहित्यम्' के रूप में प्रकाशित किया।

इस पाठ के विषय में

रचयिता: Tallapaka Annamacharya

स्रोत: vignanam.org

क्या आप जानते हैं?

रचयिता

१५वीं शताब्दी के महान तेलुगु संत ताल्लपाक अन्नमाचार्य, जिन्हें 'पद-कविता पितामह' कहा जाता है। उन्होंने तिरुपति के भगवान वेंकटेश्वर को ३२,००० से अधिक पद समर्पित किए।

समानता का संदेश

आधुनिक युग से सदियों पूर्व १४०० के दशक में अन्नमय्या ने सामाजिक भेदभाव का खंडन करते हुए कहा कि ईश्वर की दृष्टि में कोई छोटा या बड़ा नहीं है।

स्वाभाविक आवश्यकताओं का दृष्टांत

उन्होंने राजा और सेवक की नींद, भूख, पैरों तले की धरती और सूर्य की धूप का उदाहरण देकर समझाया कि प्रकृति सबके साथ एक समान व्यवहार करती है।

अंतर्यामी नारायण

गीत का मूल तत्व यह है कि ब्रह्मा से लेकर चींटी तक समस्त चराचर जगत में एक ही परमात्मा श्रीहरि अंतरात्मा के रूप में विद्यमान हैं।

शास्त्रीय संगीत में स्थान

प्रातःकालीन राग 'बौळी' में निबद्ध यह संकीर्तन भारत रत्न एम. एस. सुब्बालक्ष्मी के गायन से संपूर्ण विश्व में प्रसिद्ध हुआ।

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