यह एक भक्ति स्तोत्र है जो भगवान सुब्रह्मण्य (कार्तिकेय) की महिमा, उनके रूप, शक्ति और कृपा का वर्णन करता है। इसमें भक्त अपने कष्टों के निवारण और मोक्ष की कामना करता है।