Bharat Devotion

Brahmana

गाथा

गाथा

ब्राह्मण वर्ग धम्मपद का मुकुटमणि, सर्वाधिक विस्तृत (41 गाथाएँ, 383–423) और चरम शिखर है। इस महान उपदेश में तथागत ने 'ब्राह्मण' शब्द को जन्म, कुल, जटा, मृगचर्म और बाह्य यज्ञ-हवन की संकीर्ण परिधियों से मुक्त करके आंतरिक विशुद्धि, शील और परम अर्हत्व का सर्वोच्च आध्यात्मिक पद घोषित किया। 'तमहं ब्रूमि ब्राह्मणं' (उसी को मैं सच्चा ब्राह्मण कहता हूँ) के पावन और अनुनादी उद्घोष के साथ बुद्ध उस पूर्ण मुक्त महामानव का चित्रण करते हैं: जो समस्त प्राणियों के प्रति पूर्णतः अहिंसक है, जो कीचड़ में कमल और सूई की नोक पर सरसों के दाने की तरह सांसारिक भोगों में सर्वथा निर्लेप रहता है, जिसके सारे राग, द्वेष और अविद्या नष्ट हो चुके हैं, और जो स्वयं भव-सागर को पार कर अमर निर्वाण में प्रतिष्ठित है।

41 verses