यह एक भक्ति-कविता (वचन) है, जिसमें संत अल्लम प्रभु कहते हैं कि जिसने भगवान चेन्नमल्लिकार्जुन (शिव) को जान लिया, उसे सांसारिक सुखों, इच्छाओं और मोह की कोई आवश्यकता नहीं रहती।