यह भजन श्री कृष्ण की बाँसुरी की मधुर धुन के बारे में है, जो राधा का नाम पुकारती है, और यह बताता है कि जिस प्रकार राधा कृष्ण की हैं, उसी प्रकार मीरा भी उन्हीं की हैं — भक्ति में कोई भेद नहीं।
यह आरती भगवान श्रीकृष्ण के कुंजबिहारी स्वरूप को समर्पित है, जिसमें उनकी मनमोहक छवि, गुणों और वृंदावन की लीलाओं का वर्णन है।