संत चोखामेळा का अभंग: गन्ना टेढ़ा होता है परंतु उसका रस सीधा रहता है, जैसे धनुष टेढ़ा होता है परंतु उससे छूटा बाण सीधा जाता है। जन्म कभी भक्ति के भाव को टेढ़ा नहीं करता।