गाथा
बाल वर्ग: मूर्ख और अज्ञानी का स्वभाव (गाथा 60–75)
बाल वर्ग में 16 सारगर्भित गाथाएँ (60–75) संकलित हैं, जिनमें अज्ञानी और मूर्ख (बाल) के दोषों, अहंकार और आत्मघाती प्रवृत्तियों का मार्मिक उद्घाटन किया गया है। भगवान बुद्ध स्पष्ट करते हैं कि जो मूर्ख अपनी मूर्खता को पहचानता है, वह उस सीमा तक ज्ञानी है; किंतु जो मूर्ख स्वयं को पंडित समझता है, वही सच्चा मूर्ख है। चमचे और जीभ के भोजन-रस चखने के दृष्टांत द्वारा वे समझाते हैं कि सांसारिक लाभ का मार्ग अलग है और निर्वाण का मार्ग सर्वथा भिन्न है।
16 verses