ब्रह्मवैवर्त पुराण में वर्णित श्रावण कृष्ण पक्ष की कामिका एकादशी की पावन कथा, जिसमें तुलसी दल से भगवान विष्णु के पूजन और अनजाने में हुए ब्रह्म-हत्या जैसे पापों के प्रायश्चित का महत्व बताया गया है।