यह आठ श्लोकों का एक भक्ति स्तोत्र है, जो भगवान शिव के अगस्त्येश्वर लिङ्ग स्वरूप की महिमा का गुणगान करता है। इसमें शिव के विभिन्न रूपों, उनकी लीलाओं और उनके भक्तों की रक्षा का वर्णन है।
शिवलिंग की महिमा में आठ श्लोकों का स्तोत्र, जिसके नवें श्लोक में पाठ का फल, शिवलोक की प्राप्ति, बताया गया है।