भविष्य पुराण में वर्णित पौष शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी की पावन कथा, जिसमें महर्षि लोमश के उपदेश से राजा सुकेतुमान और रानी शैव्या को सुयोग्य तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति हुई थी।