वृंदावन की कुंजों में कृष्ण की चिर-प्रिया राधा, जिनकी विरह-वेदना तथा पूर्ण समर्पण भक्ति के सर्वोच्च रूप के रूप में पूजित हुए — ऐसी भक्ति जिसके बिना कृष्ण-उपासना स्वयं अधूरी मानी जाती है।