गुरु अमर दास जी द्वारा रचित आनंद का सम्पूर्ण शब्द (41 प्रविष्टियाँ: एक शीर्षक तथा परंपरागत 40 पौड़ियाँ), जो सतगुरु के प्रति भक्ति का उत्सव मनाता है।