संत बहिणाबाई के अभंग में वारकरी मंदिर का चित्र: ज्ञानदेव ने उसकी नींव रखी, नामदेव ने उसका विस्तार किया, एकनाथ ने उसका स्तंभ खड़ा किया और तुकाराम उसका स्वर्णिम कलश बने।