संत तुकाराम का यह विदाई-अभंग है, जिसे परंपरा के अनुसार उनके वैकुंठ-प्रस्थान के समय गाया गया: अंतिम 'राम-राम' और जीवन के बंधनों से मुक्ति का उद्घोष।