संत तुकाराम का विरह-भक्ति का अभंग: जैसे चकोर चंद्रमा के लिए और बालक माँ के लिए तरसता है, वैसे ही उनकी आत्मा विट्ठल के दर्शन की प्रतीक्षा करती है।