संत ज्ञानदेव का ‘मोगरा फुलला’: हृदय के द्वार पर रोपी गई चमेली आकाश तक चढ़ती है, और उसके पुष्प भगवान विट्ठल को अर्पित शाल में गूँथे जाते हैं।