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Embroidered artwork for गुरुद्वारा दरबार साहिब करतारपुर: 'किरत करो, नाम जपो, वंड छको' की पावन कर्मभूमि: Embroidered Khanda emblem with a saffron Nishan Sahib flag and marigolds at sunrise

गुरुद्वारा दरबार साहिब करतारपुर

'किरत करो, नाम जपो, वंड छको' की पावन कर्मभूमि

गुरुद्वारा दरबार साहिब करतारपुर

'किरत करो, नाम जपो, वंड छको' की पावन कर्मभूमि

रावी नदी के तट पर स्थित करतारपुर साहिब की स्थापना प्रथम पातशाह गुरु नानक देव जी ने सन् १५२२ में की थी। गुरु जी ने अपने जीवन के अंतिम १८ वर्ष यहाँ स्वयं हल चलाकर खेती की और 'नाम जपना, किरत करना (ईमानदारी से श्रम) और वंड छकना (बांट कर खाना)' का अमर सिद्धांत स्थापित किया।

आदर्श आध्यात्मिक कर्मयोग की स्थापना

चारों दिशाओं में चार लंबी उदासियों (यात्राओं) को पूर्ण करने के पश्चात गुरु नानक देव जी ने १५२२ ई. में रावी नदी के तट पर करतारपुर नगर की स्थापना की।

करतारपुर किसी सन्यासी का एकांत आश्रम नहीं था, बल्कि गृहस्थ जीवन, मेहनत और भक्ति का अनुपम संगम था। यहाँ गुरु जी ने स्वयं हल चलाया और यह सिद्ध किया कि गृहस्थ में रहकर भी सर्वोच्च परमात्मा को प्राप्त किया जा सकता है।

करतारपुर के प्रमुख पावन अंग

मुख्य दरबार साहिब
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:जहाँ गुरु जी नित्य संगत को उपदेश देते थे
आध्यात्मिक माहात्म्य:संगत (समानता पर आधारित सभा) की अमर नींव।
खूह साहिब (कुआं)
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:गुरु जी द्वारा खेती हेतु प्रयुक्त ऐतिहासिक कुआं
आध्यात्मिक माहात्म्य:श्रम को ईश्वर की साधना मानने का प्रतीक।
समाधि व मजार
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:गुरु जी के ज्योति-जोत समाने का स्थल
आध्यात्मिक माहात्म्य:हिंदू व मुस्लिम दोनों परंपराओं के श्रद्धा केंद्र एक ही छत के नीचे।
करतारपुर कॉरिडोर
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:२०१९ में खुला वीज़ा-मुक्त गलियारा
आध्यात्मिक माहात्म्य:भारतीय श्रद्धालुओं को नित्य दर्शन की सुविधा प्रदान करने वाला शांति सेतु।

पावन गुरबाणी शबद

घालि खाइ किछु हथहु देइ।

नानक राहु पछाणहि सेइ॥

के तपाईं जान्नुहुन्छ?

Scriptural Source

Guru Nanak's teaching on honest labor, "Ghaal Khaae Kichh Hathhon Dehi," is recorded on Ang 1245 of the Guru Granth Sahib, composed during the very years he farmed Kartarpur's fields.

Dual Funerary Memorials

When Guru Nanak passed away in 1539, his Hindu and Muslim followers both wished to perform funeral rites according to their customs; finding only flowers beneath his sheet, they divided the cloth, creating a Samadhi and a Mazaar side by side.

Succession of Guru Angad Dev Ji

At Kartarpur, Guru Nanak chose Bhai Lehna as his successor after testing his humility and devotion, bestowing upon him the name Guru Angad, part of my own body.

Historic Visa-Free Corridor

In November 2019, on the 550th birth anniversary of Guru Nanak, the Kartarpur Corridor was inaugurated, allowing Indian pilgrims visa-free access across the border.

Organic Sacred Fields

The 42-acre fields surrounding the Gurdwara are still cultivated organically, supplying fresh produce directly to the community Langar.

Guru Nanak Dev Ji का सम्पूर्ण स्तुति र पाठ

Guru Nanak Dev Ji

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