अखंड पाठ
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
अखंड पाठ
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'अखंड' (अटूट, निरंतर) + 'पाठ' (पढ़ना) से — संपूर्ण गुरु ग्रंथ साहिब का निरंतर, बिना रुके पाठ, जो सामान्यतः लगभग 48 घंटों में बिना विराम के पूर्ण किया जाता है।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
अखंड पाठ प्रसन्नता के अवसरों (विवाह, नया घर) तथा शोक (मृत्यु) दोनों में संपन्न किया जाता है, यह मान्यता दर्शाते हुए कि दैवीय शब्द की अखंड उपस्थिति स्वयं आराम का स्रोत है।