बीज मन्त्र
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
बीज अक्षर/सूत्र
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
संस्कृत 'बीज' (बीज, अंकुर) से — एक संक्षिप्त, अक्सर एक-अक्षर वाला पवित्र स्वर, जिसे किसी देवता या मंत्र का सार माना जाता है।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
'ॐ', 'ह्रीं', या 'क्लीं' जैसा बीज अपने आप में एक पूर्ण मंत्र के रूप में जपा जाता है, कोई संक्षेपण नहीं — परंपरा मानती है कि इसकी ध्वनि स्वयं, किसी शाब्दिक अर्थ से स्वतंत्र, देवता की शक्ति धारण करती है।