कर्म वर्गणा
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
कर्म पदार्थ के कण
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'कर्म' और 'वर्गणा' (समान कणों का समूह) से बना; जैन दर्शन की अनूठी मान्यता कि कर्म कोई अमूर्त नैतिक बल नहीं बल्कि वास्तविक, अत्यंत सूक्ष्म भौतिक कण हैं जो आत्मा से चिपकते हैं।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
क्योंकि कर्म भौतिक पदार्थ माना जाता है, इसे तप तथा शुद्ध आचरण द्वारा शाब्दिक रूप से 'धोया' या 'जलाया' जा सकता है — यही विशेषता जैन कर्म सिद्धांत को अन्य भारतीय परंपराओं से अलग करती है।