कोश
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
आवरण; परतें
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
संस्कृत में 'आवरण'; तैत्तिरीय उपनिषद में वर्णित पाँच परतें — अन्नमय (भौतिक), प्राणमय (ऊर्जामय), मनोमय (मानसिक), विज्ञानमय (बुद्धिमय), तथा आनंदमय (आनंदमय) — जो सच्चे आत्मा को घेरे रहती हैं।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
योगिक साधना कोशों के माध्यम से बाहर से भीतर की ओर कार्य करती है — शरीर (आसन) से आरंभ होकर श्वास व मन से गुजरती हुई, जब तक केवल शुद्ध चेतना का आनंदमय, सबसे भीतरी आवरण शेष न रह जाए।