कुंडलिनी
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
मूलाधार में सुप्त दिव्य आध्यात्मिक शक्ति
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
संस्कृत 'कुण्डल' (कुंडलीदार/सर्पिलाकार रूप)।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
साधना द्वारा जाग्रत होकर सुषुम्ना मार्ग से ऊपर उठने वाली परम चेतना शक्ति।