Bharat Devotion

ॐ (प्रणव)

शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)

मूल गुंजायमान ध्वनि

व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)

'प्र' (आगे) और 'नु' (ध्वनि करना) से बना; मांडूक्य उपनिषद में समस्त सृष्टि के मूल कंपन के रूप में वर्णित, जिसके तीन ध्वन्यात्मक भाग (अ-उ-म) चेतना की जाग्रत, स्वप्न, तथा गहरी नींद अवस्थाओं को दर्शाते हैं।

आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ

तीन श्रव्य ध्वनियों से परे एक चौथी, मौन अवस्था (तुरीय) है जिसकी ओर ॐ अंततः इंगित करता है — जाग्रत, स्वप्न, तथा निद्रा तीनों के नीचे स्थित शुद्ध, अविभाज्य चेतना।

ॐ (प्रणव) का उल्लेख इन लेखों में