फलश्रुति
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
फल की श्रुति (सुनना)
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
संस्कृत 'फल' (परिणाम) और 'श्रुति' (सुनना, घोषणा) से — पाठ के लाभों की समापन-घोषणा।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
कई स्तोत्रों में पाए जाने वाले समापन पद्य, जो भक्तिपूर्वक पाठ करने से परंपरागत रूप से मिलने वाले आशीर्वाद — रक्षा, समृद्धि, मुक्ति — का वर्णन करते हैं; यह पाठ को प्रेरित करने की एक सदियों पुरानी परंपरा है, कोई शाब्दिक अनुबंध नहीं।