राज योग
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
राजसी मार्ग
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'राज' (राजा, राजसी) + 'योग' से — मानसिक तथा ध्यानात्मक अनुशासन का 'राजसी' मार्ग, पतंजलि के अष्टांग योग का एक अन्य नाम जो शरीर पर मन की महारत पर बल देता है।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
स्वामी विवेकानंद ने 1896 की अपनी इसी नाम की पुस्तक के माध्यम से पश्चिम में 'राज योग' शब्द को लोकप्रिय बनाया, पतंजलि की प्रणाली को धार्मिक हठधर्मिता के बजाय मानसिक महारत के व्यावहारिक विज्ञान के रूप में प्रस्तुत करते हुए।