संत परंपरा
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
संतों की परंपरा
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'संत' (धार्मिक साधक) और 'परंपरा' से बना; 14वीं-17वीं सदी का उत्तर भारतीय भक्ति आंदोलन, जिसमें गुरु रविदास, कबीर, नामदेव, नानक जैसे संत सम्मिलित थे, सभी निर्गुण भक्ति तथा जाति-विरोधी शिक्षा हेतु साझा।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
गुरु रविदास जी की वाणी का गुरु ग्रंथ साहिब में कबीर तथा नामदेव की वाणी के साथ सम्मिलित होना इस बात का प्रमाण है कि संत परंपरा की सीमाएँ कभी कठोर नहीं थीं — यह एक साझा, परस्पर जुड़ा आंदोलन था।