सत्संग
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
सत्य/साधुओं की संगति
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'सत्' (सत्य, अस्तित्व) + 'संग' (संगति) से — सत्य, आध्यात्मिक विचारधारा वाले व्यक्तियों, या साक्षात्कृत गुरु की संगति में रहने की प्रथा।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
हिंदू परंपरा मानती है कि व्यक्ति जिसकी संगति रखता है वह उसकी आध्यात्मिक दिशा को गहराई से आकार देती है — सत्संग को सबसे शक्तिशाली, सुलभ साधनाओं में से एक माना जाता है क्योंकि इसके लिए किसी विशेष कौशल की नहीं, केवल उपस्थिति की आवश्यकता है।