उपनयन
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
समीप ले जाना; यज्ञोपवीत संस्कार
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'उप' (निकट) और 'नयन' (ले जाना) से बना; युवा विद्यार्थी को औपचारिक वैदिक शिक्षा में दीक्षित करने वाला संस्कार, जिसमें यज्ञोपवीत का औपचारिक धारण तथा गुरु द्वारा गायत्री मंत्र का कर्णोपदेश सम्मिलित है।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
परंपरागत रूप से 'द्वितीय जन्म' (इसीलिए 'द्विज', द्विज-जन्मा) कहा जाता है, उपनयन उस क्षण को चिह्नित करता है जब बालक मात्र भौतिक अस्तित्व के बजाय सचेत आध्यात्मिक जिम्मेदारी के जीवन में प्रवेश करता माना जाता है।