यह एक दिव्य स्तोत्र है जो देवी अखिलाण्डनायिका (सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की स्वामिनी) की स्तुति करता है। इसमें उनकी अलौकिक सुंदरता, शक्ति और कृपा का वर्णन किया गया है तथा उनकी शरण में जाने का भाव व्यक्त किया गया है।