गणपति अथर्वशीर्ष (गणपति उपनिषद्), अथर्ववेद-परम्परा का वह पाठ जो गणेश को ब्रह्म और आत्मा के रूप में स्तुत करता है।
माण्डूक्योपनिषद् (अथर्ववेद): ओंकार, चेतना की तीन अवस्थाओं और मौन चतुर्थ अवस्था तुरीय पर बारह मंत्र।