यह एक गुरबाणी का भाग है जो बताता है कि बाहरी रीति-रिवाज, तीर्थ, पाठ, और संसार की शक्ति मोक्ष नहीं देगी; पनाकी एकमात्र उपाय भगवान से सच्चा निःस्वार्थ।।