यह एक पवित्र स्तोत्र है जिसमें भगवान भैरव के अघोर स्वरूप के एक हजार नामों का वर्णन है। यह संवाद देवी भैरवी और भगवान भैरव के बीच हुआ है।
यह एक पवित्र प्रार्थना है, जिसे कवच कहा जाता है। इसमें भगवान शिव के अघोर रूप से सभी दिशाओं और परिस्थितियों में अपनी रक्षा करने और आशीर्वाद देने की प्रार्थना की जाती है।