वचन
देह ही शिवालय – बसवन्ना का वचन
यह एक प्रसिद्ध भक्ति कविता (वचन) है जिसमें भक्त अपने शरीर के अंगों को भगवान शिव के मंदिर के विभिन्न भागों के रूप में वर्णित करता है और अंत में प्रश्न करता है कि क्या यह मानव-निर्मित मंदिर स्थायी है या नाशवान।
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