यह एक प्रसिद्ध बौद्ध श्लोक है जो बुद्ध की शिक्षा का सार बताता है: सभी बुरे कर्मों से बचना, अच्छे कर्मों को अपनाना, और अपने मन को शुद्ध करना ही सच्चा धर्म है।