दुर्गा सप्तश्लोकी: देवी महात्म्य से संकलित देवी की स्तुति के सात श्लोक, जो रक्षा और मनोरथ-सिद्धि के लिए पढ़े जाते हैं।
यह स्तोत्र देवी की स्तुति है जो सृष्टि की रक्षक और संहारक हैं। इसमें देवी के विभिन्न रूपों और उनकी शक्तियों का वर्णन है।
देवी महात्म्य (5.9-5.80) की देवी स्तुति, जिसमें देवता देवी को हर प्राणी में बुद्धि, निद्रा और दया के रूप में विद्यमान मानकर प्रणाम करते हैं।
माँ अम्बे गौरी की लोकप्रिय आरती: उनके तेजस्वी रूप, असुरों पर विजय और भक्तों को सुख-संपत्ति के आशीर्वाद का वर्णन, विशेषकर नवरात्रि में गाई जाती है।
यह देवी के कवच (रक्षा-कवच) का पाठ है, जो देवी महात्म्य (सप्तशती) के पाठ से पहले किया जाता है। इसमें नवदुर्गाओं और विभिन्न देवियों का आह्वान कर शरीर के प्रत्येक अंग और दिशाओं की रक्षा की प्रार्थना की गई है।