कैसे राजा इंद्रद्युम्न ने जगन्नाथ, बलभद्र तथा सुभद्रा की दिव्य प्रतिमाओं का निर्माण करवाया, तथा दिव्य शिल्पी विश्वकर्मा ने उन्हें सदा के लिए हाथ-पैर रहित क्यों छोड़ा, इसकी कथा।
भक्तकवि सालबेग का १७वीं सदी का ओड़िया 'जणाण', जिसमें वे नीलशैल जगन्नाथ से अपने जीवन के दुःखों को कुचल देने की प्रार्थना करते हैं।