पद्म पुराण में वर्णित ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की भीमसेनी निर्जला एकादशी की पावन कथा, जिसमें जल की एक बूँद भी ग्रहण किए बिना व्रत रखा जाता है।