विट्ठल को भोर में प्रेम से जगाने वाली काकड़ आरती, जिसमें 'तुका म्हणे' की छाप है और जो इसलिए संत तुकाराम की मानी जाती है; पंढरपुर और महाराष्ट्र में गाई जाती है।
संत तुकाराम का ध्यान-अभंग: ईंट पर कटि पर हाथ धरे खड़े, तुलसी-माला और पीतांबर धारी पंढरपुर के विट्ठल के सुंदर स्वरूप का भक्ति-पूर्ण वर्णन।