वराह पुराण में वर्णित चैत्र शुक्ल पक्ष की कामदा एकादशी की पावन कथा, जिसके प्रभाव से गन्धर्व ललित राक्षस योनि से मुक्त हुआ और पतिव्रता ललिता की मनोकामना पूर्ण हुई।