यह भजन संत तुकाराम द्वारा रचित है, जिसमें प्रकृति के बीच एकान्त में रहने के आनंद का वर्णन है। पेड़-पौधे, पक्षी और वन्य जीव साथी बन जाते हैं, और हरि कथा ही भोजन बन जाती है।
संत तुकाराम का यह प्रसिद्ध मराठी अभंग प्रकृति और ईश्वर की एकता का संदेश देता है। तुकाराम महाराज कहते हैं कि पेड़, पौधे और वन के पक्षी ही हमारे सच्चे सगे-संबंधी हैं, जो हमें शांत मन से श्री विट्ठल का ध्यान करने की प्रेरणा देते हैं।