भगवान विष्णु के नौ पावन नवग्रह दिव्य देशम
यह शनिदेव की स्तुति का एक लोकप्रिय भजन है, जिसमें उनके रूप, गुण और कृपा का वर्णन किया गया है। इसे पढ़ने से भक्तों के कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख-शांति आती है।
नौ श्लोकों का यह स्तोत्र नौ ग्रहों से उनकी प्रतिकूल स्थिति से उत्पन्न पीड़ा हरने की प्रार्थना है। प्रत्येक श्लोक में एक ग्रह का आह्वान है।
स्कन्दपुराण का बारह श्लोकों का मङ्गल (मंगल ग्रह) स्तोत्र, जिसमें ऋण, दरिद्रता और मंगल-जनित कष्टों से मुक्ति की प्रार्थना है।
सूर्यपुत्र धीमी गति वाले शनि के १०८ नाम, शनि बीज मन्त्र के साथ, और भक्त उनकी कृपा कैसे माँगते हैं इसका एक संकेत।
सूर्य देव के १०८ नाम, सूर्य बीज मन्त्र और ध्यान के दो श्लोकों के साथ, प्रत्येक नाम ॐ और नमः के साथ।