कनकधारास्तोत्रम् आदि शंकराचार्य द्वारा रचित २१ श्लोकों का अत्यंत प्रसिद्ध और कल्याणकारी महालक्ष्मी स्तोत्र है। बाल संन्यासी शंकर जब भिक्षा के लिए एक अत्यंत निर्धन ब्राह्मणी के द्वार पर पहुंचे, तो उसने रोते हुए अपने घर का एकमात्र सूखा आंवला दान कर दिया। उसकी निश्छल त्याग भावना से द्रवित होकर शंकराचार्य ने महालक्ष्मी की यह अमृतमयी स्तुति की, जिससे प्रसन्न होकर मां लक्ष्मी ने उस कुटिया में सोने के आंवलों की वर्षा कर दी।
21 verses