यह रचना एक काल्पनिक शहर 'बेगम पुरा' का वर्णन करती है, जहाँ न कोई दुख है, न भय, न कर, और न कोई चिंता। यह मोक्ष या परम शांति की अवस्था का एक प्रतीकात्मक चित्रण है।