यह एक सिख प्रार्थना है जो ईश्वर की रक्षा और कृपा की स्तुति करती है। इसमें भक्तों को संतों की संगति में संसार-समुद्र से पार उतारने और दुष्टों का नाश करने की प्रार्थना की गई है।