शब्द
भक्त रविदास की बाणी: मलार राग में सच्ची भक्ति का संदेश
यह रचना भक्त रविदास की है, जिसमें वे अपनी नीच समझी जाने वाली जाति (चमार) का उल्लेख करते हुए कहते हैं कि प्रभु के नाम का रस पीकर वे पवित्र हो गए हैं। वे समझाते हैं कि बाहरी तीर्थों और रीति-रिवाजों से नहीं, बल्कि सच्ची भक्ति और संतों की संगति से ही संसार-सागर पार किया जा सकता है।
5 verses