वृंदावन की कुंजों में कृष्ण की चिर-प्रिया राधा, जिनकी विरह-वेदना तथा पूर्ण समर्पण भक्ति के सर्वोच्च रूप के रूप में पूजित हुए — ऐसी भक्ति जिसके बिना कृष्ण-उपासना स्वयं अधूरी मानी जाती है।
कृष्ण लीला की पावन परिक्रमा
यह एक भजन और ध्यान यात्रा है, जिसमें श्रोता मानसिक रूप से ब्रज के पवित्र स्थानों की यात्रा करते हैं और श्री राधा के नाम का जाप करते हैं।
यह भजन श्री कृष्ण की बाँसुरी की मधुर धुन के बारे में है, जो राधा का नाम पुकारती है, और यह बताता है कि जिस प्रकार राधा कृष्ण की हैं, उसी प्रकार मीरा भी उन्हीं की हैं — भक्ति में कोई भेद नहीं।
यह एक भक्ति गीत (आरती) है जो देवी राधा की स्तुति में गाया जाता है, जिन्हें श्रीकृष्ण की प्रियतमा और वृषभानु की पुत्री माना जाता है। इसमें उनकी मनमोहक मूर्ति, दिव्य गुणों और भक्तों को मुक्ति देने वाली शक्ति का वर्णन है।