समता का जैन अभ्यास
गुरु और उपाध्याय को नमन करने वाला संक्षिप्त प्राकृत स्तोत्र, जो इन्द्रिय-संयम, जीवों की रक्षा और दशलक्षण धर्म में निष्ठा की स्तुति करता है।