संत एकनाथ का ‘काया ही पंढरी’: देह स्वयं पंढरपुर है, अंतर्यामी आत्मा विट्ठल है, और भक्ति भीमा नदी के रूप में बहती है।
संत एकनाथ का ‘माझे माहेर पंढरी’: पंढरपुर एक विवाहित पुत्री का प्रिय मायका है, जहाँ विट्ठल और रखुमाई माता-पिता हैं और पुंडलीक भाई हैं।